बच्चों की मोबाइल की लत से हैं परेशान, बिना डांटे ऐसे कम करें स्क्रीन टाइम

आज के दौर में मोबाइल, टैबलेट और टीवी बच्चों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। कई बच्चे कार्टून या वीडियो देखते हुए खाना पसंद करते हैं और स्क्रीन बंद करने पर रोने या जिद करने लगते हैं। ऐसे में अचानक मोबाइल छीनना या डांटना समस्या को और बढ़ा सकता है।

बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने के लिए सख्ती के बजाय धीरे-धीरे उनकी आदत और दिनचर्या बदलना ज्यादा कारगर हो सकता है।

1. स्क्रीन टाइम का तय करें समय

बच्चे को हर समय फोन देने के बजाय दिन में स्क्रीन देखने के लिए कुछ निश्चित समय तय करें। उदाहरण के लिए लंच के बाद 30 मिनट या होमवर्क पूरा करने के बाद 45 मिनट।

बच्चे को पहले से बता दें कि उसे स्क्रीन कब मिलेगी। खाने, खेलने, पढ़ने और स्क्रीन टाइम का एक आसान टाइम-टेबल भी बनाया जा सकता है। इससे बच्चे को अचानक फोन छीने जाने जैसा महसूस नहीं होगा।

2. अचानक फोन बंद न करें, पहले दें चेतावनी

अगर बच्चा किसी वीडियो या गेम में व्यस्त है और अचानक स्क्रीन बंद कर दी जाए, तो उसका नाराज होना स्वाभाविक है। इसलिए स्क्रीन टाइम खत्म होने से पहले उसे धीरे-धीरे तैयार करें।

पहले 10 मिनट बाकी होने की जानकारी दें, फिर 5 मिनट और आखिर में 2 मिनट की चेतावनी दें। बच्चे के साथ मिलकर टाइमर लगाना भी मददगार हो सकता है।

साथ ही पहले से बता दें कि स्क्रीन बंद होने के बाद क्या करना है—जैसे बाहर खेलना, ड्राइंग करना या कोई गेम खेलना। इससे बच्चे का ध्यान आसानी से दूसरी गतिविधि की ओर लगाया जा सकता है।

3. घर में बनाएं ‘स्क्रीन-फ्री’ जोन

पूरे घर में सख्त पाबंदी लगाने के बजाय कुछ खास जगहों और समय को स्क्रीन-फ्री बनाया जा सकता है।

मसलन, डाइनिंग टेबल पर फोन नहीं चलेगा, बेडरूम में स्क्रीन नहीं होगी और सोने से पहले कुछ समय मोबाइल से दूरी रखी जाएगी।

इन नियमों को सिर्फ बच्चों पर लागू करने के बजाय पूरे परिवार का नियम बनाना बेहतर है। अगर माता-पिता भी खाने के समय फोन दूर रखेंगे, तो बच्चों के लिए नियम मानना आसान होगा।

4. मोबाइल के बदले मजेदार एक्टिविटी दें

सिर्फ यह कहना कि “अब टैबलेट बंद करो” काफी नहीं है। स्क्रीन बंद करने के बाद बच्चे के पास करने के लिए कोई मजेदार विकल्प भी होना चाहिए।

बच्चों को पजल, ड्राइंग, कलरिंग, ब्लॉक्स, बोर्ड गेम, गेंद खेलने या क्राफ्ट एक्टिविटी में लगाया जा सकता है। छोटे बच्चों के लिए शेप मैचिंग, बीड्स अलग करना, ड्राइंग या खिलौनों को व्यवस्थित करने जैसी गतिविधियां भी विकल्प हो सकती हैं।

अगर स्क्रीन के बाद मिलने वाली एक्टिविटी बच्चे को पसंद आती है, तो मोबाइल से दूर जाना उसे सजा जैसा महसूस नहीं होगा।

5. गुस्से और जिद पर भी रखें धैर्य

स्क्रीन टाइम कम करने की शुरुआत में बच्चे का रोना, नाराज होना या जिद करना सामान्य हो सकता है। ऐसे समय में बच्चे की भावनाओं को समझना जरूरी है, लेकिन तय नियम को बार-बार बदलना भी ठीक नहीं।

अगर बच्चा रोने के बाद दोबारा मोबाइल हासिल कर लेता है, तो उसे यह संदेश मिल सकता है कि जिद या रोने से नियम बदला जा सकता है। इसलिए माता-पिता को शांत रहते हुए तय नियम पर कायम रहना चाहिए।

एक दिन में नहीं बदलेगी बच्चों की आदत

बच्चों की स्क्रीन की आदत अचानक खत्म नहीं होगी। इसके लिए माता-पिता को लगातार एक जैसी दिनचर्या अपनानी होगी। निश्चित स्क्रीन टाइम, पहले से चेतावनी, स्क्रीन के बाद मजेदार गतिविधियां और परिवार के लिए स्क्रीन-फ्री नियम धीरे-धीरे नई आदत बनाने में मदद कर सकते हैं।

ध्यान रखें: हर बच्चे की उम्र, जरूरत और परिस्थितियां अलग होती हैं। इसलिए स्क्रीन टाइम से जुड़े नियम बच्चे की उम्र और परिवार की दिनचर्या के अनुसार तय करना बेहतर है।