NEET UG-2025 फर्जीवाड़ा: स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे से MBBS दाखिले के मामले में दो गिरफ्तार

देहरादून। नीट यूजी-2025 में कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे से एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के मामले में एसआईटी ने दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की जांच में तीन अभ्यर्थियों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनके आधार पर अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में दाखिला कराने का मामला सामने आया है।

पुलिस के अनुसार, प्रत्येक दाखिले के लिए 45 लाख रुपये में सौदा तय किया गया था। आरोप है कि अभ्यर्थियों के परिजनों से 20-20 लाख रुपये एडवांस लिए गए थे। मामले में एसआईटी अब अन्य आरोपितों की भूमिका और फर्जी दस्तावेज तैयार करने से लेकर दाखिले तक की पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है।

दो थानों में दर्ज हुए थे मुकदमे

पुलिस के मुताबिक, 13 सितंबर को थाना रायपुर और क्लेमेंटाउन में कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जाने की शिकायत प्राप्त हुई थी। जांच के दौरान दस्तावेज फर्जी पाए जाने पर दोनों थानों में अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने पुलिस अधीक्षक ग्रामीण जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया। टीम ने संबंधित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच के साथ ही संबंधित शिक्षण संस्थानों से भी रिकॉर्ड जुटाए।

जांच में दस्तावेजों में दर्ज पते गलत पाए गए। शिक्षण संस्थानों से प्राप्त रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस ने अभ्यर्थियों के वास्तविक पतों की जानकारी जुटाई और मामले की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं।

कंसल्टेंसी के जरिए दाखिले का आरोप

एसआईटी की जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपित रूपेश पंडित पिछले करीब पांच वर्षों से एजुकेशन कंसल्टेंसी का काम कर रहा था। पुलिस के अनुसार, मेरठ में वह ‘मिकोडो (MECODO) पाठशाला’ नाम से कंपनी संचालित करता था।

पुलिस का कहना है कि इस कंपनी के माध्यम से निजी विश्वविद्यालयों और विदेशों में एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए, बीबीए और बीकॉम सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों में कमीशन के आधार पर दाखिले कराए जाते थे।

जांच के अनुसार, अरविन्द कुमार रूपेश का पुराना परिचित है। अपनी बेटी के एमबीबीएस दाखिले के लिए उसने रूपेश से संपर्क किया था। इसके बाद दो परिचितों के बच्चों के दाखिले को लेकर भी बातचीत हुई।

45 लाख रुपये में तय हुआ था प्रत्येक दाखिले का सौदा

पुलिस के मुताबिक, रूपेश और उसके साथियों ने तीनों अभ्यर्थियों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे से एमबीबीएस में दाखिला दिलाने का भरोसा दिया। इसके लिए प्रत्येक दाखिले का सौदा 45 लाख रुपये में तय किया गया।

आरोप है कि तीनों अभ्यर्थियों के परिजनों से 20-20 लाख रुपये एडवांस लिए गए थे। शेष रकम दाखिला होने और कक्षाएं शुरू होने के बाद देने की बात तय हुई थी।

फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर कराया दाखिला

एसआईटी के अनुसार, रूपेश ने अपने साथियों के साथ मिलकर तीनों अभ्यर्थियों के कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर कथित तौर पर फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाए गए।

पुलिस का आरोप है कि इन प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल कर तीनों अभ्यर्थियों ने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में दाखिला लिया।

पूछताछ के बाद दोनों गिरफ्तार

साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी ने रूपेश पंडित और अरविन्द कुमार को पूछताछ के लिए थाना रायपुर बुलाया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ और अब तक सामने आए साक्ष्यों के आधार पर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

एसआईटी मामले में अन्य आरोपितों की भूमिका, फर्जी दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया और मेडिकल कॉलेजों में दाखिले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। पुलिस ने कहा है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रकरण में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

गिरफ्तार आरोपित

  • रूपेश पंडित — निवासी पूर्णिया, बिहार; वर्तमान पता ब्रह्मपुरी, मेरठ।

  • अरविन्द कुमार — निवासी बहादरपुर खादर, थाना लक्सर, हरिद्वार।