PM Vishwakarma Yojana: 15 अगस्त पर लाल किले पहुंचे योजना के 100 लाभार्थी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से जुड़े कारीगरों और शिल्पकारों के लिए स्वतंत्रता दिवस 2026 खास बन गया है। सरकार ने दिल्ली-NCR क्षेत्र के योजना के 100 लाभार्थियों को 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर पर आयोजित 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया।

पारंपरिक कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का उद्देश्य पारंपरिक हुनर और शिल्प से जुड़े कारीगरों को आधुनिक सुविधाओं, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता के माध्यम से आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।

योजना के तहत बढ़ई, लोहार, सुनार, कुम्हार, मूर्तिकार, राजमिस्त्री, नाई, दर्जी और कई अन्य पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों को सहायता दी जाती है।

सरकार के अनुसार योजना के तहत बड़ी संख्या में कारीगरों को प्रशिक्षण और आधुनिक टूलकिट उपलब्ध कराई जा रही है। जून 2026 की सरकारी जानकारी के अनुसार 16 लाख कारीगरों को आधुनिक टूलकिट उपलब्ध कराई जा चुकी थी, जबकि 5.92 लाख कारीगरों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ा गया।

बिना गारंटी मिल सकता है कारोबार के लिए ऋण

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत पात्र कारीगरों को अपना काम बढ़ाने के लिए ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है। इसका उद्देश्य पारंपरिक व्यवसायों को आधुनिक बाजार से जोड़ना और कारीगरों की आय बढ़ाने में मदद करना है।

सरकार योजना के जरिए कारीगरों को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि कौशल प्रशिक्षण, टूलकिट और बाजार से जुड़ने के अवसर भी उपलब्ध करा रही है।

देशभर के कारीगरों को मिल रहा लाभ

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना सितंबर 2023 में शुरू की गई थी। दिसंबर 2025 तक इस योजना में करीब 30 लाख लाभार्थी पंजीकृत हो चुके थे और इनमें से 23.09 लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका था।

योजना के तहत तैयार उत्पादों की ऑनलाइन मार्केटिंग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे पारंपरिक कारीगर अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचा सकें।

15 अगस्त पर सम्मान से बढ़ा कारीगरों का उत्साह

लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह में योजना के लाभार्थियों को विशेष अतिथि के रूप में बुलाया जाना सरकार की उस पहल को रेखांकित करता है, जिसमें देश के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

योजना का उद्देश्य साफ है—देश के पारंपरिक हुनर को आधुनिक संसाधनों से जोड़कर कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाना और उनके उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाना।