उत्तराखंड में मानसून की दस्तक, 2 जुलाई को होगी राज्य की सबसे बड़ी आपदा मॉक ड्रिल
देहरादून: उत्तराखंड में 30 जून को मानसून ने आधिकारिक तौर पर दस्तक दे दी है। हालांकि, मौसम विभाग ने इस वर्ष राज्य में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना जताई है। इस बीच मानसून के मद्देनज़र राज्य सरकार ने 2 जुलाई को सभी 13 जनपदों में अब तक की सबसे व्यापक आपदा मॉक ड्रिल आयोजित करने की तैयारी पूरी कर ली है।
मौसम विज्ञान वैज्ञानिक डॉ. रोहित थपलियाल ने बताया कि जून 2026 में उत्तराखंड में 83 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि जून माह का सामान्य औसत 132 मिमी है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है।
66 स्थानों पर होगी राज्यव्यापी मॉक ड्रिल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर 2 जुलाई को राज्य के सभी 13 जिलों में कुल 66 स्थानों पर व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। इनमें लगभग 95 प्रतिशत स्थान नए शामिल किए गए हैं, ताकि विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली का वास्तविक परीक्षण किया जा सके। मुख्यमंत्री स्वयं भी मॉक ड्रिल का निरीक्षण करेंगे।
टेबल टॉप एक्सरसाइज में परखी गई तैयारियां
मॉक ड्रिल से पहले मंगलवार को उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) के राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित की गई। इसमें सभी 13 जिलों और विभिन्न विभागों की आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली, समन्वय, संसाधनों की उपलब्धता और राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों की समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान अतिवृष्टि, बाढ़, भूस्खलन, जलभराव और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी संभावित परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों की रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई। साथ ही जेसीबी, बोट, राफ्ट, गोताखोर, जल पुलिस और अन्य संसाधनों के उपयोग तथा राहत शिविरों की व्यवस्थाओं का भी परीक्षण किया गया।
आपदा प्रबंधन में समन्वय बढ़ाने पर जोर
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि मॉक ड्रिल का उद्देश्य केवल अभ्यास करना नहीं, बल्कि वास्तविक आपदा की स्थिति में विभिन्न विभागों की तत्परता, त्वरित निर्णय क्षमता, संसाधनों के बेहतर उपयोग और समन्वित प्रतिक्रिया प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाना है।
उन्होंने कहा कि पूर्व तैयारी ही प्रभावी आपदा प्रबंधन की सबसे मजबूत आधारशिला है और समय रहते कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करना जन-धन की हानि को काफी हद तक कम कर सकता है।
आधुनिक राहत उपकरणों की प्रदर्शनी बनी आकर्षण
टेबल टॉप एक्सरसाइज के दौरान एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और अग्निशमन विभाग ने आधुनिक राहत एवं बचाव उपकरणों की प्रदर्शनी भी लगाई। प्रदर्शनी में सीबीआरएनई (रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु आपदाओं) से निपटने वाले उपकरण, डीप डाइविंग सेट, नाइट विजन कैमरा, थर्मल इमेजिंग कैमरा, हाइड्रोलिक कटर, अंडरवाटर कम्युनिकेशन सिस्टम, अंडरवाटर ड्रोन और सोनार सिस्टम जैसे अत्याधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी 2 जुलाई को इन उपकरणों का अवलोकन करेंगे।
एसडीआरएफ ने हासिल किया 100 प्रतिशत लक्ष्य
यूएसडीएमए द्वारा संचालित 'सचेत' और 'भूदेव' मोबाइल ऐप डाउनलोड अभियान के तहत एसडीआरएफ के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने दोनों ऐप अपने मोबाइल फोन में डाउनलोड कर लिए हैं। विभाग ने शत-प्रतिशत डाउनलोड का लक्ष्य हासिल कर लिया है।
सचिव विनोद कुमार सुमन ने एसडीआरएफ की सराहना करते हुए कहा कि तकनीक आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली आपदा प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और राज्यभर में अधिक से अधिक लोगों तक मौसम एवं आपदा संबंधी समय पर चेतावनी पहुंचाने के लिए यह अभियान लगातार चलाया जा रहा है।