राज्य सूचना आयुक्त योगेश भट्ट ने त्रिवर्षीय कार्यकाल पूरा किया


देहरादून। राज्य सूचना आयुक्त योगेश भट्ट ने शुक्रवार को अपना तीन वर्ष का कार्यकाल पूर्ण कर लिया है। मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी, अन्य आयुक्त व कर्मियों ने भट्ट के कार्यकाल की सराहना करते हुए विदाई दी। 

अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जो भविष्य के लिए नजीर साबित होंगे। सुनवाई के दौरान भट्ट ने समय-समय पर कई अहम आदेश भी जारी किए जिनसे सूचना का अधिकार अधिनियम की मूल भावना को बल मिला है।

तीन वर्ष की अवधि में उन्होंने कुल 1480 मामलों की सुनवाई की जिनमें से सभी का निस्तारण किया गया। उनके पास आए मामलों की पेंडेंसी शून्य है। सूचना प्रदान करने में हीलाहवाली बरतने वाले अधिकारियों के प्रति उनका रवैया सख्ता रहा, ऐसे अधिकारियों पर उन्होंने कुल 11.81 लाख रूपये का अर्थदण्ड भी लगाया।

   मूल रूप से पत्रकार रहे योगेश भट्ट ने 21 दिसम्बर 2022 को राज्य सूचना आयुक्त के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था। तीन वर्ष के कार्यकाल में उनके समक्ष 1310 अपील और 170 शिकायतें विचार के लिए पंजीकृत हुईं जिनका शत प्रतिशत निस्तारण किया गया। उत्तराखण्ड में यह पहला मौका है जब किसी राज्य सूचना आयुक्त ने अपना कार्यकाल पूर्ण होने पर एक भी शिकायत लम्बित नहीं छोड़ी। उनके निर्णयों से सूचना का अधिकार के प्रति सकारात्मक माहौल बना। उन्होंने न सिर्फ आवेदकों को सूचना सुलभ कराई बल्कि समय समय पर लोक सूचना अधिकारियों एवं विभागीय अधिकारियों का इस कानून के परिपेक्ष्य में मार्गदर्शन भी किया।

वक्फ बोर्ड की सम्पत्तियों को सूचना के अधिकार के दायरे में लाना, सीसीटीवी फुटेज को सुनवाई की अवधि में सम्बंधित कार्यालय द्वारा निर्धारित समय तक संरक्षित रखने, अधिवक्ता सिर्फ आम नागरिक के रूप में ही सूचना मांगे व क्लीनिकल स्टेबलिशमेंट एक्ट के अन्तर्गत रिजिस्टर्ड निजी अस्पतालों के बारे में सूचना मांगे जाने पर सीएमओ व राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण सूचना देने के लिए बाध्य होंगे जैसे ऐतिहासिक निर्णयों के लिए भट्ट का कार्यकाल याद किया जाएगा।
इसके अलावा, खटीमा नगर पालिका में कार्यरत एक कर्मचारी को वर्षों पुराना पीएफ एवं ग्रेज्युटी का भुगतान करवाने, हरिद्वार स्थित हरकी पैड़ी में वर्षों से बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को चालू करवाने, कागजों पर चल रहे टाइगर रिजर्व फाउंडेशन को धरातल पर उतारने, नगर निगम में 30 सालों में गुम हुई पत्रावलियों का अधिकारिक डाटा तैयार करवाने, वन निगम कर्मी को 22 साल पुराना भुगतान दिलवाने तथा सरकारी खाद्यान्न योजना से एक पात्र व्यक्ति को 17 कुंतल 500 ग्राम राशन एकमुश्त दिलवाने जैसै उनके फैसलों को जनता द्वारा काफी सराहा गया।

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