केंद्र सरकार ने यूपी और उत्तराखंड समेत चार राज्यों में जनगणना का कार्यक्रम बदला
नई दिल्ली/देहरादून। केंद्र सरकार की जनगणना-2027 की तैयारियों के बीच उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लोगों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। केंद्र सरकार ने आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड के गैर-बर्फीले क्षेत्रों, पंजाब और गोवा में जनसंख्या गणना का कार्यक्रम पहले निर्धारित समय से आगे बढ़ा दिया है।
नई व्यवस्था के तहत इन राज्यों में 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक स्व-गणना (Self Enumeration) की प्रक्रिया चलेगी। इसके बाद 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक जनगणना कर्मचारी घर-घर जाकर परिवारों की जानकारी जुटाएंगे।
मोबाइल से खुद भर सकेंगे जनगणना का विवरण
इस बार जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता डिजिटल व्यवस्था है। पहली बार नागरिकों को ऑनलाइन स्व-गणना का विकल्प दिया गया है। इसके माध्यम से परिवार का कोई सदस्य आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपने घर और परिवार से संबंधित निर्धारित जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेगा।
ऑनलाइन जानकारी जमा करने के बाद एक विशिष्ट सेल्फ एन्यूमरेशन आईडी (SE ID) जारी होगी। जनगणना कर्मचारी के घर पहुंचने पर यह आईडी उपलब्ध करानी होगी, ताकि दर्ज की गई जानकारी का सत्यापन किया जा सके।
ऑनलाइन स्व-गणना के लिए आधिकारिक पोर्टल है:
https://se.census.gov.in/
1 दिसंबर से शुरू होगा घर-घर सर्वे
स्व-गणना की अवधि समाप्त होने के बाद जनगणना कर्मचारी घर-घर पहुंचेंगे। यह प्रक्रिया 4 जनवरी 2027 तक चलेगी। इसके बाद 5 से 9 जनवरी 2027 तक पुनरीक्षण का कार्य किया जाएगा।
पहली बार पूरी तरह डिजिटल होगी जनगणना
केंद्र सरकार की जनगणना-2027 योजना देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी। इसके लिए मोबाइल एप और ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किए गए हैं। इस बार जनगणना के दूसरे चरण में जातिगत आंकड़ों को भी शामिल किया जाएगा।
केंद्र सरकार ने जनगणना के संचालन के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। इस राष्ट्रीय कार्य में लगभग 30 लाख कर्मचारी और अधिकारी लगाए जाएंगे।
उत्तराखंड के लिए क्या है खास?
उत्तराखंड में जनगणना का कार्यक्रम भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार निर्धारित किया गया है। 16 नवंबर से 30 नवंबर तक स्व-गणना और 1 दिसंबर से 4 जनवरी तक जनसंख्या गणना उत्तराखंड के गैर-बर्फीले क्षेत्रों में होगी। बर्फ से प्रभावित क्षेत्रों के लिए अलग कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।
जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल भविष्य की सरकारी योजनाओं, विकास कार्यों, संसाधनों के वितरण और विभिन्न कल्याणकारी कार्यक्रमों की योजना बनाने में किया जाएगा।
इस बार नागरिकों को पहली बार अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करने का अवसर मिलेगा। हालांकि, ऑनलाइन स्व-गणना के बाद भी जनगणना कर्मचारियों द्वारा सत्यापन की प्रक्रिया जारी रहेगी।