भारत के प्रधान न्यायाधीश ने किया लेखक गांव का भ्रमण

देहरादून स्थित लेखक गांव में भारत के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के आगमन पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें उन्होंने रचनात्मकता, संस्कृति और विधि पेशे की महत्ता पर विस्तृत विचार साझा किए।

रचनात्मकता को जीवन का अनिवार्य हिस्सा बताया

लेखक गांव पहुंचने पर जस्टिस सूर्यकांत का स्वागत डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ और डॉ. विदुषी निशंक द्वारा किया गया। इस दौरान उन्होंने कहा कि लेखक गांव जैसी पहल अत्यंत सराहनीय है और यह स्थान रचनात्मक ऊर्जा से भरपूर है। उन्होंने युवाओं को अपनी भाषा, साहित्य और परंपराओं के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया।

कार्यक्रम में कई पद्म सम्मान प्राप्त व्यक्तित्व और शिक्षाविद उपस्थित रहे, जिन्होंने जस्टिस सूर्यकांत के साथ संवाद में भाग लिया।

विधि छात्रों को दिया महत्वपूर्ण संदेश

कार्यक्रम के दूसरे चरण में जस्टिस सूर्यकांत ने विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए विधि छात्र-छात्राओं से बातचीत की। उन्होंने कहा कि विधि का पेशा धैर्य, समर्पण और निरंतर मेहनत मांगता है।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि:

  • करियर की शुरुआत भले देर से हो, लेकिन यह जीवनभर सेवा का अवसर देता है
  • अधिवक्ताओं को पैसे को प्राथमिकता नहीं बनाना चाहिए
  • न्याय के प्रति समर्पण ही असली सफलता का मार्ग है

छात्रों ने भी उत्साहपूर्वक अपनी जिज्ञासाएं रखीं और एक जिम्मेदार अधिवक्ता बनने का संकल्प लिया।

लेखक गांव के प्रयासों की सराहना

जस्टिस सूर्यकांत और अन्य अतिथियों ने परिसर का भ्रमण कर अटल पथ, नक्षत्र वाटिका और अन्य विकास कार्यों की सराहना की। उन्होंने भविष्य में फिर से यहां आकर युवाओं और लेखकों से संवाद करने की इच्छा भी जताई।

वैश्विक पहचान की ओर बढ़ता लेखक गांव

इस अवसर पर डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि लेखक गांव को एक वैश्विक रचनात्मक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि:

  • 65 से अधिक देशों के लेखक इससे जुड़े हैं
  • 50 से अधिक पद्म सम्मान प्राप्त हस्तियां मार्गदर्शन दे रही हैं

उन्होंने इसे विश्व स्तर पर रचनाधर्मियों का प्रमुख केंद्र बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

 

यह कार्यक्रम न केवल विधि छात्रों के लिए प्रेरणादायक रहा, बल्कि रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी के महत्व को भी रेखांकित करता है। लेखक गांव अब एक ऐसे मंच के रूप में उभर रहा है, जहां साहित्य, संस्कृति और न्याय जैसे विषयों का समन्वय देखने को मिलता है।

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